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मजदूरों के बच्चों को सस्ती फीस में कोचिंग, 8 लाख स्टूडेंट्स; पटना हाईकोर्ट से क्या बोले खान सर?

खान सर ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी कोचिंग का मॉडल बताया—गरीब और मजदूर वर्ग के लिए किफायती शिक्षा, जो अब विवाद की चपेट में है। FIR रद्द करने और संस्थान खोलने की मांग।

Aasmin Shah

Jun 11, 2026 09:57 am
मजदूरों के बच्चों को सस्ती फीस में कोचिंग, 8 लाख स्टूडेंट्स; पटना हाईकोर्ट से क्या बोले खान सर?

पटना की कोचिंग इंडस्ट्री में इन दिनों तनाव का माहौल है। एक तरफ छात्रों की भीड़ और सपनों की दौड़, दूसरी तरफ प्रतिद्वंद्विता जो हिंसा तक पहुंच गई। इसी बीच चर्चित शिक्षक फैजल खान, जिन्हें हम खान सर के नाम से जानते हैं, ने पटना हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका सिर्फ कानूनी राहत की मांग नहीं है—यह बिहार जैसे राज्य में शिक्षा की पहुंच और सामर्थ्य पर एक बड़ा सवाल उठाती है।

खान सर ने अपनी याचिका में स्पष्ट रूप से बताया कि वे मजदूर, रिक्शा चालक, घरेलू कामगार और निम्न-आय वाले परिवारों के बच्चों को सस्ती फीस पर प्रतियोगी परीक्षाओं—बिहार पुलिस कांस्टेबल, SSC, UPSC आदि—की तैयारी कराते हैं। उनका दावा है कि उनके संस्थान खान ग्लोबल स्टडीज से करीब 8 लाख छात्र-छात्राएं जुड़े हुए हैं, जिनमें 20,000 ऑफलाइन नामांकित हैं और साढ़े सात से आठ लाख ऑनलाइन कोर्स कर रहे हैं। रोजाना 7-8 हजार छात्र क्लास अटेंड करते हैं। यह संख्या कोई आम आंकड़ा नहीं—यह बिहार के उन युवाओं का प्रतिनिधित्व करती है जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते।

2 जून की रात को उनके मुसल्लहपुर हाट स्थित केंद्र पर हुए हमले ने सब कुछ बदल दिया। याचिका के अनुसार, 15-20 लोगों के एक समूह ने परिसर में घुसकर गार्ड पर हमला किया, जिसमें गार्ड को सिर में गंभीर चोट आई। प्रबंधन ने प्रतिद्वंद्वी कोचिंग (ज्ञान बिंदु) से जुड़े लोगों पर FIR दर्ज कराई। बाद में सुरक्षा गार्डों द्वारा की गई गोलीबारी का वीडियो सामने आया, जिसके आधार पर खान सर पर भी अलग FIR दर्ज हुई—जिसमें प्रयास हत्या और आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गईं। खान सर का पक्ष है कि यह आत्मरक्षा थी और FIR प्रतिशोधपूर्ण है।

हाईकोर्ट में खान सर की दलीलें सिर्फ घटना तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने अपनी शिक्षक पहचान, गरीब छात्रों के प्रति प्रतिबद्धता और पुलिस जांच में सहयोग को रेखांकित किया। CCTV फुटेज और हथियार उपलब्ध कराने का जिक्र भी किया गया। कोर्ट ने याचिका पर राज्य सरकार से चार हफ्तों में जवाब मांगा है, अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय हुई है। इससे पहले जिला कोर्ट ने गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

यह मामला पटना की कोचिंग संस्कृति की गहराई दिखाता है। यहां सफलता के दावे, रिजल्ट की होड़ और व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता अक्सर टकराती है। खान सर का मॉडल—कम फीस, बड़े पैमाने पर पहुंच—कई पारंपरिक संस्थानों के लिए चुनौती है। एक तरफ लाखों छात्रों का समर्थन, दूसरी तरफ कानूनी उलझन और संस्थान बंद होने से होने वाला वित्तीय व शैक्षणिक नुकसान। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जो अंत में सबसे बड़ी कीमत चुकाते हैं।

इस घटनाक्रम से शिक्षा के व्यावसायीकरण पर सवाल उठते हैं। क्या सस्ती और गुणवत्तापूर्ण कोचिंग सिर्फ सपना है या इसे बढ़ावा देने की जरूरत है? खान सर जैसे शिक्षक बिहार के ग्रामीण और मध्यम वर्ग के लिए उम्मीद की किरण बने हैं, लेकिन विवाद उन्हें और उनके छात्रों को प्रभावित कर रहा है। कोर्ट का फैसला न सिर्फ इस FIR का, बल्कि शिक्षा के समावेशी मॉडल की वैधता का भी परीक्षण करेगा।

अंत में, यह याद दिलाता है कि शिक्षा सिर्फ परीक्षाओं की तैयारी नहीं—यह सामाजिक गतिशीलता का माध्यम है। खान सर की कहानी चाहे जो भी मोड़ ले, लाखों छात्रों की आकांक्षाएं इससे जुड़ी हुई हैं।

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