बिहार की शिक्षा जगत और राजनीति इन दिनों एक साथ गरमा हुई है। मशहूर यूट्यूबर और कोचिंग संचालक खान सर, जिनका असली नाम फैजल खान है, एक बार फिर सुर्खियों में हैं – लेकिन इस बार सकारात्मक वजह से नहीं। बीजेपी के विधायक नीरज कुमार बबलू ने उन्हें सीधे-सीधे फ्रॉड करार दिया और पाकिस्तान से रिश्ते का गंभीर आरोप लगाया। यह बयान तब आया जब बबलू ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत पर परिवार को सांत्वना देने पहुंचे थे।
दरअसल, कहानी की शुरुआत 2 जून को पटना के खान ग्लोबल स्टडीज इंस्टीट्यूट पर हुए हमले से जुड़ी है। एक समूह ने कोचिंग पर पथराव किया और सुरक्षा गार्ड पर हमला बोला। जवाब में खान सर के बॉडीगार्ड्स ने हवा में फायरिंग की, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा। पुलिस ने खान सर के खिलाफ अटेम्प्ट टू मर्डर और आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज की। खान सर का कहना है कि यह सेल्फ-डिफेंस था, जबकि विरोधी पक्ष इसे साजिश बता रहा है। कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी है, लेकिन विवाद थमा नहीं।
नीरज बबलू ने इस मौके पर खुलकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि खान सर उत्तर प्रदेश से बिहार में ठगने आया है, वह असली शिक्षक नहीं बल्कि फर्जीगिरी करता है। सबसे विवादास्पद हिस्सा यह था जब उन्होंने फैजल या अफजल जैसे नामों का जिक्र करते हुए पाकिस्तान से रिश्ता और नेपाल से कनेक्शन का दावा किया। बबलू ने मांग की कि मुख्यमंत्री से मिलकर पूरी डिटेल देंगे और मामले को विधानसभा में उठाएंगे। उन्होंने छात्रों को भी चेतावनी दी कि ऐसे फर्जी शिक्षकों से बचें।
यह आरोप खान सर की लोकप्रियता को देखते हुए काफी गंभीर हैं। खान सर ने लाखों छात्रों को सस्ती और प्रभावी तैयारी कराई है, खासकर बिहार और आसपास के इलाकों में। उनका यूट्यूब चैनल करोड़ों सब्सक्राइबर्स वाला है, जहां वे सरल भाषा में इतिहास, करंट अफेयर्स और कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स पढ़ाते हैं। कई छात्र उन्हें सिस्टम के खिलाफ आवाज मानते हैं – चाहे NEET पेपर लीक हो या कोचिंग माफिया। लेकिन आलोचक उन्हें सिलेक्टिव बताते हैं, जहां वे एक पक्ष पर ज्यादा फोकस करते दिखते हैं।
विवाद की गहराई:
रौशन आनंद ने खान सर पर आरोप लगाया कि उनकी जान को खतरा है और यह कोचिंग राइवलरी का नतीजा है। प्रिंस यादव की मौत को वे हत्या मान रहे हैं और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ, खान सर के समर्थक इसे राजनीतिक टारगेटिंग बता रहे हैं। बिहार में कोचिंग इंडस्ट्री पहले से ही कॉम्पिटिशन, कमर्शियलाइजेशन और रेगुलेशन की बहस में घिरी हुई है। सरकार जल्द ही इस राइवलरी पर नई पॉलिसी लाने की बात कर रही है।
यह घटनाक्रम बिहार की शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। एक तरफ स्टार टीचर्स लाखों युवाओं को सपना दिखा रहे हैं, दूसरी तरफ राइवलरी हिंसा तक पहुंच रही है। राजनीतिक दलों के लिए भी यह मौका है – कुछ इसे वोट बैंक की लड़ाई बना रहे हैं, जबकि असली मुद्दा छात्रों का भविष्य और सुरक्षित लर्निंग एनवायरनमेंट है।
खान सर का केस सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं। यह बड़े सवाल उठाता है: ऑनलाइन और ऑफलाइन कोचिंग का रेगुलेशन क्या होना चाहिए? क्या राजनीति शिक्षा को बर्बाद कर रही है? और सबसे अहम – आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच सच्चाई क्या है? जांच एजेंसियां अगर निष्पक्ष तरीके से काम करें, तो ही सही तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल, बिहार के युवा इस ड्रामा को करीब से देख रहे हैं, क्योंकि उनका करियर दांव पर है।
"The decisions we make today will shape the world for generations to come."







