पटना की कोचिंग इंडस्ट्री इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह शिक्षा नहीं बल्कि हिंसा और कानूनी लड़ाई है। लोकप्रिय शिक्षक फैसल खान, जिन्हें करोड़ों छात्र खान सर के नाम से जानते हैं, अब खुद एक गंभीर मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। 2 जून की रात को उनके कोचिंग सेंटर खान ग्लोबल स्टडीज के बाहर पथराव, तोड़फोड़ और कथित फायरिंग की घटना ने पूरे मामले को नया रूप दे दिया।
पटना पुलिस की जांच के मुताबिक, भीड़ ने सिक्योरिटी गार्ड पर हमला किया और संस्थान को नुकसान पहुंचाया। इसके जवाब में खान सर के दो गार्ड्स ने हवा में फायरिंग की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गार्ड्स के बयान के आधार पर खान सर का नाम भी FIR में आ गया—Section 109 BNS (हत्या के लिए उकसावा) और Arms Act की धाराओं 25(9), 27, 35 के तहत। पुलिस का दावा है कि गार्ड्स ने बताया कि खान सर ने ही उन्हें फायरिंग का आदेश दिया था।
यह घटना एक प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान (ज्ञान बिंदु) के डायरेक्टर रौशन आनंद से जुड़ी मानी जा रही है। पहले रौशन आनंद और उनके साथियों को गिरफ्तार किया गया था, अब खान सर पर पलटवार का आरोप लग रहा है। खान सर के वकील अरविंद कुमार मावड़ ने इसे साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि फायरिंग आत्मरक्षा में हुई थी, किसी को चोट नहीं आई, और FIR में खान सर का नाम गलत तरीके से जोड़ा गया है। उन्होंने साफ किया कि खान सर सरेंडर नहीं करेंगे, बल्कि 8 जून को अग्रिम जमानत (anticipatory bail) की याचिका दाखिल करेंगे।
क्यों पहुंचा मामला इस मोड़ पर?
बिहार में कोचिंग सेंटरों के बीच प्रतिस्पर्धा लंबे समय से चली आ रही है। सफलता के आंकड़े, छात्रों की भीड़ और सोशल मीडिया वायरल होने के चलते राइवलरी तेज हो गई है। खान सर जैसे शिक्षक, जो कम फीस में गुणवत्तापूर्ण तैयारी कराते हैं, बड़े पैमाने पर लोकप्रिय हुए हैं। लेकिन यही लोकप्रियता कभी-कभी टकराव पैदा करती है। घटना के वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस को सबूत मिले, जिनमें हथियार भी शामिल हैं, जिन्हें FSL भेजा गया है।
छात्रों का एक वर्ग खान सर के समर्थन में सड़क पर उतर आया है, जबकि प्रतिद्वंद्वी पक्ष उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। शिक्षक और छात्र नेता रौशन आनंद की रिहाई की मांग कर रहे हैं और खान सर की गिरफ्तारी की। पुलिस की SIT कई जगहों पर छापेमारी कर रही है, और खान सर की लोकेशन को लेकर कयासबाजी चल रही है।
कानूनी पहलू और आगे क्या?
Arms Act की धाराएं गैर-जमानती होती हैं, इसलिए अग्रिम जमानत मिलना आसान नहीं होगा। कोर्ट को सबूत, बयान और परिस्थितियों को देखना होगा—क्या फायरिंग आत्मरक्षा थी या उकसावे का नतीजा? 8 जून को याचिका दाखिल होने के बाद सेशन कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है। अगर जमानत मिल गई तो खान सर पढ़ाई जारी रख सकेंगे, वरना कानूनी लड़ाई लंबी खिंच सकती है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या संस्थान का नहीं है। यह बिहार की कोचिंग संस्कृति, छात्रों की आकांक्षाओं और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन का प्रतिबिंब है। लाखों छात्र खान सर पर भरोसा करते हैं; उनका भविष्य इस विवाद से प्रभावित न हो, यही सबसे बड़ी चिंता है। निष्पक्ष जांच और जल्द फैसला जरूरी है, ताकि शिक्षा का माहौल फिर से सामान्य हो सके।
"The decisions we make today will shape the world for generations to come."

